बिसरे हुए अनुबंध

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बिसरे हुए अनुबंधों को,

अपने सज्जा विहीन छंदों को,

खो चुके संबंधों को,

संभावनाओं के प्रबंधों को,

जब भी स्मरण में पाता हूँ,

एक अलौकिक भाव से भर जाता हूँ।

.

कभी उनके पदचाप,

कभी शुष्क-से संताप,

कभी बस तैरती-सी एक छाया,

कभी अपरिभाषित कोई काया,

कभी संज्ञान से परे, बोधातीत एक सुगंध,

कभी एक कोना, आमंत्रण देता परंतु बंद,

भ्रम जाल-सा प्रतीत होता,

जीवन का हिस्सा है या मात्र एक धोखा?

.

एक आधा जगा, आधा सोया विश्वास,

इतना कुछ नहीं हो सकता अनायास,

क्या किसी का कोई नियोजित अभ्यास,

षडयंत्र, माया या मेरे अर्धचेतन प्रयास,

अंग है यह मेरे चेतन जीवन का

या कोई छद्म मेरे अचेतन का?

.

ये जो भी हैं, यथार्थ हैं, या किस्सा हैं,

मेरे जीवन का एक हिस्सा हैं,

समझ से परे हैं, घटना नहीं, प्रसंग हैं,

जीवन के किसी उच्चतर आयाम के अंग हैं।

सुलझाने के प्रश्न नहीं, आभास हैं तरंग हैं,

मौलिकता के पहले अवयव, मन के पहले छंद हैं।

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