
यायावर को स्नेह,
विपरीत स्वर को स्नेह,
निज-अपर को स्नेह,
हर मूक-मुखर को स्नेह,
पर पग बाधा को कभी नहीं,
आत्मश्लाघा को कभी नहीं।
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हर बलिदान का स्मरण,
हर नवनिर्माण का स्मरण,
कृतज्ञता, स्वाभिमान का स्मरण,
जगत कल्याण का स्मरण,
वैमनस्य का कभी नहीं,
घृणा द्वेष का कभी नहीं।
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जीवन को, गति को नमन,
उन्मेष की मति को नमन,
विवेक की सम्पत्ति को नमन,
हर अंत-उत्पत्ति को नमन,
लिप्सा की भाषा को कभी नहीं.
अमरता की पिपासा को कभी नहीं।
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हर वंचित को सहयोग,
हर वांछित को सहयोग,
ज्ञान के तृषित को सहयोग,
कल के हर हित को सहयोग,
वर्चस्ववाद को कभी नहीं,
आधारहीन विवाद को कभी नहीं।
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आभार, कृतज्ञता में समर्पण,
प्रेम और मित्रता में समर्पण,
भावना की सुन्दरता में समर्पण,
सृष्टि की विराटता में समर्पण,
क्रोध, अन्याय में कभी नहीं,
अनुचित अभिप्राय में कभी नहीं।
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रचना में सहयोग सर्वथा,
नित नूतन प्रयोग सर्वथा,
दम्भ से वियोग सर्वथा,
ज्ञान, विज्ञान, योग सर्वथा,
निर्बल पर बल प्रयोग कभी नहीं,
आक्रांता से संयोग कभी नहीं।
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असंगत विचार को क्षमा,
अस्वीकार को क्षमा,
तिरस्कार को क्षमा,
दुर्व्यवहार को क्षमा,
पर अत्याचार को कभी नहीं,
अंधकार को कभी नहीं।
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