
वजह ना हो तो मुस्कुराना भी मुश्किल होता है,
अंधेरे में एक दीया जलाना भी मुश्किल होता है ।
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बेतकल्लुफ होने की बातें जितना भी कर लें हम सब,
बिन बुलाये कहीं आना-जाना भी मुश्किल होता है ।
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तुम्हारे घर को अपना ही कहता आया हूँ लेकिन,
न बिठाओ अगर तो बैठ पाना भी मुश्किल होता है ।
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खुद पे जाहिर हो अगर अपनी ही शर्मिंदियाँ,
किसी को अपना चेहरा दिखाना भी मुश्किल होता है ।
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मुँह फेरा थी एक बार जब पुकारा था उसने,
अब किसी से नजर मिलाना भी मुश्किल होता है ।
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हुनर हर दौर के सीख लिये हैं हमने लेकिन,
फकत साफगोई इसमें नहीं कभी शामिल होता है ।
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तजुर्बे तो हर वक्त देती रहती है जिंदगी हमको,
नहीं जीने का तरीका उनसे कभी हासिल होता है ।
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मेरा सब कुछ तुम्हारा है, तकिया कलाम ही तो है,
अपना खास कुछ देने में हर शख्स तंगदिल होता है ।
poems.bkd@gmail.com

Bahut badhiya….
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मेरी रचनाओं पर ध्यान देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद। आभारी हूँ।
अपनी आलोचना और सुझाव भेजते रहें।
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