मुश्किल होता है

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वजह ना हो तो मुस्कुराना भी मुश्किल होता है,

अंधेरे में एक दीया जलाना भी मुश्किल होता है ।

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बेतकल्लुफ होने की बातें जितना भी कर लें हम सब,

बिन बुलाये कहीं आना-जाना भी मुश्किल होता है ।

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तुम्हारे घर को अपना ही कहता आया हूँ लेकिन,

न बिठाओ अगर तो बैठ पाना भी मुश्किल होता है ।

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खुद पे जाहिर हो अगर अपनी ही शर्मिंदियाँ,

किसी को अपना चेहरा दिखाना भी मुश्किल होता है ।

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मुँह फेरा थी एक बार जब पुकारा था उसने,

अब किसी से नजर मिलाना भी मुश्किल होता है ।

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हुनर हर दौर के सीख लिये हैं हमने लेकिन,

फकत साफगोई इसमें नहीं कभी शामिल होता है ।

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तजुर्बे तो हर वक्त देती रहती है जिंदगी हमको,

नहीं जीने का तरीका उनसे कभी हासिल होता है ।

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मेरा सब कुछ तुम्हारा है, तकिया कलाम ही तो है,

अपना खास कुछ देने में हर शख्स तंगदिल होता है ।

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2 thoughts on “मुश्किल होता है”

    1. मेरी रचनाओं पर ध्यान देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद। आभारी हूँ।
      अपनी आलोचना और सुझाव भेजते रहें।

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