प्रतिरोध और करुणा

प्रतिरोध अगर न कहीं पड़े,
पौरुष अगर न कहीं अड़े,
तो बल कोइ कहाँ लगायेगा?
शून्य से लड़ क्या पायेगा?

आँखों में यदि पानी न हो,
पड़ पीड़ा पहचानी न हो,
दिन रात बीतते जायेंगे
क्या यह जीवन कहलायेगा?
या शून्य ही शून्य रह जायेगा?