
सुरभित काया, सुरभित आनन,
सुरभित आंगन, सुरभित जन-जन,
मलयानिल आ बसा यहीं पर,
सुरभित मन, वाणी और चिंतन।
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आशा कुसुमित, आशय कुसुमित,
नया-नया यह परिचय कुसुमित,
मन के भाव स्नेह से विह्वल,
नये योग का अभ्युदय कुसुमित।
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वाणी पुलकित, भाषा मधुमय,
दिग-दिगंत और काल सदय,
मंगल कामना हों सबके सार्थक,
आशीर्वाद चिर काल हो अक्षय।
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साक्षात मंगल गोचर सम्मुख,
वरदहस्त प्रकृति का प्रस्तुत,
नयन सजल, मन में उल्लास,
अगले पल को समय भी उत्सुक।
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श्रेष्ठों का आशीष प्राप्त हो,
देवों का नित्य वरदान मिले,
रचने को आकाश, धरा हो,
नव जीवन में सम्मान मिले।
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हे सूर्य-चंद्र, हे क्षितिज सकल,
तुम सब साक्षी पावन, अविचल,
सौभाग्य सिंधु अनंत काल तक,
रहे प्रवाहमान अक्षुण्ण, अविरल
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