
सूना मन,
जैसे दिन का आकाश,
खालीपन,
जैसे भूख और प्यास,
भरा हुआ,
नीरवता का आभास,
शून्य,
जैसे गहराता विश्वास,
कहना कठिन है,
धन है या ऋण है ?
.
आत्मविभोर,
जैसे पूनम का चंद्रमा,
स्वनामधन्य,
जैसे अपेक्षा रहित क्षमा,
चिर सम्मोहन,
धरती का सूर्य की परिक्रमा,
सदा अज्ञेय,
अपने ही अंदर बसती आत्मा,
होकर भी अपनी परिभाषा,
तृप्त नहीं करते जिज्ञासा ।
.
बीते दिन,
जैसे काल, स्मृति का बंदी होकर,
इतिहास,
समय का अमिट हस्ताक्षर,
भविष्य,
एक चिर सम्मोहन प्रखर,
वर्तमान,
जैसे अनिश्चितता का मुखर स्वर,
काल और प्राण का सम्बंध,
और जीवन से जीव का अनुबंध ।
.
संगीत,
जैसे बहाव में आकृति,
क्षितिज के रंग,
जैसे आशा की अंतहीन अनुकृति,
सौंदर्य,
सृष्टि की सफलतम कलाकृति,
संवेदना,
सृष्टि में चेतना की पहली स्वीकृति,
सब कुछ अपने स्थल,
विवेक, क्षमा, स्नेह, कौशल ।
.
धन्यता,
जीवन के सार्थक होने से उगती,
सार्थकता,
कुछ रचने में विश्वास और प्रगति,
विश्वास,
कि कोई उद्देश्य, प्रयोजन की अनुभूति,
उद्देश्य,
जड़ता का निषेध, चेतना की प्रकृति,
कई प्रश्न अंत में अनुत्तरित रहे,
क्या हो अंतिम उत्तर कौन कहे ।
poems.bkd@gmail.com
