तुझको ही आजमा सकूँ

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इसलिये खोना कि उसको ही फिर से पा सकूँ,

और पाने की खुशी में दीया फिर एक जला सकूँ,

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दूर होना ताकि फिर से लौट कर पास आ सकूँ,

क्या होती है पाने की धड़कन दिल को यह बतला सकूँ,

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सच कहूँ खामोश रहना, नयी मेरी कोई जिद नहीं,

चुप हूँ बस इसलिये कि नया कुछ फिर से गा सकूँ,

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तंग गलियों में भटकना, निपट अकेले रात भर,

घर मुझे प्यारा है, सवेरे दिल को ये समझा सकूँ,

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अपने में सिमट कर रहने की, वजह कोई और नहीं,

कोई अपना-सा लगे तो, फिर बाँहों को फैला सकूँ,

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कभी-कभी सब कुछ बिखेरना अच्छा लगता इसलिये,

खुद को ही सब कुछ समेट कर, एक बार दिखला सकूँ,

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कुछ और नहीं तो बस इसलिये कई बार रुक जाता हूँ,

रफ्तार के जुनून को एक बार फिर महसूस कर पा सकूँ,

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हौसला भी, जिद भी, चाहत भी और जरूरत भी है,

सब कुछ मिटा कर एक बार, फिर नये सिरे से बना सकूँ,

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जिन्दगी तेरे दिये इन रहमतों को दिल से सलाम,

इतना कुछ दिया तुमने कि तुझको ही आजमा सकूँ,

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