
जो बीता, मृदुल था या प्रचण्ड था,
वह हमसे होकर निकला एक कालखंड था,
अब नहीं है पर हमारे चिंतन में मुखर है,
हमारे जीवन पटल पर समय का हस्ताक्षर है,
जो आयेगा, थोड़ा भय और थोड़ा प्रलोभन है,
थोड़ी आशा, थोड़ा विश्वास, थोड़ा सम्मोहन है,
यह क्षण जो बीत रहा है,
आकलन से परे है, जीवन है ।
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कोई विघटन नहीं, एक निरंतरता है,
जो बीता है, हमको रचता है,
देता है सामर्थ्य, आगत के साक्षात्कार का,
उसके स्वागत और उससे संघर्ष के विचार का,
जीवन के लिये नीति का व्यवहार का,
अपने लिये नियमों का, आधार का ।
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जो आगामी है, हमारा पथ भी है लक्ष्य भी,
अपने परिष्कार का अवसर भी है,
रचने की सम्भावना भी,
देखे स्वप्न का प्रत्यक्षीकरण भी है,
अनदेखे स्वप्न के जगने का संयोग भी,
साक्षात अज्ञात संभावनाओं का भँवर है,
हमारे अब तकी यात्रा पर हमारा ही अभियोग भी ।
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आसन्न क्षण जो मूर्तिमान है,
प्रत्यक्ष है वर्तमान है,
मात्र एक प्रश्न पूछता है,
हमने उसके प्रवाह के लिये,
मन के कौन-से द्वार खोले हैं,
कितना ढाला है खुद को,
उन साँचों में,
जिनमें हम चाहते हैं ढलना ।
यही एक सार्थकता है,
बाकी निरी अकर्मण्यता, दुविधा और छलना ।
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