खुशी, कुछ देर और ठहर

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मेरे नहीं तो किसी और के घर,

खुशी, कुछ देर और ठहर,

जीना आता है तेरे बिन लेकिन,

अच्छा लगता है तेरे साथ सफर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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आज भी तेरा पता मालूम नहीं,

लोग पूछते हैं, मैं टाल देता हूँ,

मुस्कुराता हूँ कि तलाश तेरी,

ले कर गयी मुझको किधर-किधर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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लोग कहते थे तुम्हारे बारे में,

कि तुम कभी भी मिल सकती हो,

खोजता हूँ तुझे रात के अंधेरों में,

और ढूँढ़ता हूँ सुबह, शाम, दोपहर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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फूलों से, तितली से, पंछी से,

माँगी उधार, तो वे कहने लगे,

तलाश अपनी, है तुझ में ही कहीं,

फिर सम्हाल ले जा उसे अपने घर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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खयाल रखूंगा तेरी नाजुक मिजाजी का,

वादा है दूर से ही देखूंगा तुझको,

कल जरा-सा जो छू के देखना चाहा,

तुम टुकड़ों में टूट कर थी गयी बिखर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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बड़ दिलचस्प है रिश्ता हमारा तुम्हारा,

किसी भी जगह या तुम हो या हम,

तुम क्या करती हो मालूम नहीं मुझको,

तेरी आहटों से मैं जाता हूँ निखर-निखर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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शायद मैंने ही की कोशिश कुछ कम,

वरना जाती नहीं तुम बार-बार आकर,

तुझे उसकी या मेरी में नहीं बाँटूंगा कभी,

कहीं ठहर, बस थोड़ा और ठहर ।

खुशी, कुछ देर और ठहर ।

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