
उसे जानने की जिद में लगा रहा,
जिंदगी बगल से गुजर गयी,
फिर पूछता रहा हर शख्श से,
बता दे जिंदगी किधर गयी ।
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कोई शिकायत नहीं, बस इतना,
कि छू कर देखना है उसको,
मैं बेपरवाह, तो वह क्या थी,
जो वादा करके मुकर गयी ।
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कुछ बातें कहनी है उससे,
अब तक नहीं कर पाया हूँ,
बसी जो मेरे सपनों में थी,
दिलचस्प कहानी किधर गयी ।
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जगी आँखों के सपने मेरे,
आँखों में कटती पागल रातें,
समेटता बाँहों में, कि छूते ही,
वक्त की लहरों में बिखर गयी ।
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अफसोस नहीं उसके जाने का,
खूबसूरत थी हरेक लम्हे में,
वही तो है जो सिर्फ मेरी है,
बाकी थोड़ी दूर ही ठहर गयी ।
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हसीन कहूँ या दिलफरेब कहूँ,
नियामत कहूँ या कयामत कहूँ,
और कुछ नहीं बस जिंदगी कहूँ,
अच्छी गुजरी, जितनी गुजर गयी ।
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