कभी खत्म नहीं होती

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छोटी-सी है एक बात जो कभी खत्म नहीं होती,

अपने से मुलाकात है जो कभी खत्म नहीं होती ।

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मैं खुद चला या मुझको चलाया गया,

कुछ याद है, तो बाकी क्यों भुलाया गया,

लौ जो एक जलती रही है सीने में हरदम,

खुद जली या उसको भी है जलाया गया,

इन मुद्दों की बारात कभी खत्म नहीं होती ।

छोटी-सी है एक बात जो कभी खत्म नहीं होती ।

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जिस पर चला मैं वह राह किसने दिखायी,

जाती कहाँ है और है किस ओर से आयी,

चलना और पहुँचना कितने एक या जुदा,

आज तक किसी ने यह बात नहीं बतायी,

खुद से शह और मात कभी खत्म नहीं होती ।

छोटी-सी है एक बात जो कभी खत्म नहीं होती ।

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ख्वाहिशें कितनी हो तो अच्छा है होना,

उन्हें पाने का जुनून करता बड़ा या बौना,

मापते इस सब को हम किस औजार से,

कुछ पाने मतलब क्यों थोड़ा खुद को है खोना,

तिलिस्म की यह रात कभी खत्म नहीं होती ।

छोटी-सी है एक बात जो कभी खत्म नहीं होती ।

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क्या होता अगर सारे ये सवाल नहीं होते,

कम सोचते, इतने सारे खयाल नहीं होते,

समय के संग गुजर तो जाती जिन्दगी,

पर उनके कद इतने विशाल नहीं होते,

नेमत है या खैरात, कभी खत्म नहीं होती,

छोटी-सी है एक बात जो कभी खत्म नहीं होती ।

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