आगे ही बढ़ती है

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मेघ से छन कर आती किरणों ने मुझसे कहा,

परेशान मत हो,

सूरज बिल्कुल ठीक है,

और यह कुछ देर की ही बात है ।

.

मेघ से गिरी एक बूंद ने मुझे बताया,

बादल फिर आयेगा,

फिर बारिश होगी,

अभी सूरज के ताप ने छीन ली है नमी,

पर बादल फिर से उठा लायेगा पानी,

और यह कुछ देर की ही बात है ।

.

दोनों की बातें मुझे सच्ची लगी,

और मैंने दोनों से दोस्ती कर ली ।

.

अब तक मैं दोनों से नाराज था,

कि ये कभी भी हमारा कहा नहीं करते हैं,

पर अचानक बहुत कुछ बदल गया,

मुझे अपनी नाराजगी बेमतलब लगने लगी,

मैं तय नहीं कर पा रहा था,

यह मेरी नयी-नयी दोस्ती का असर है,

या मैं अब समझने लगा हूँ,

कि कुछ है जो हमारी निजी नाराजगी से बेहतर है ।

.

जिन एहसासों को मैंने सही मान लिया था,

उन्हें अच्छी तरह जानता हूँ,

ऐसा मन ही मन ठान लिया था,

हर वक्त सोचता रहा था,

सिर्फ गुजरते वक्त ने नहीं सिखायी हैं ये बातें,

 मैं उन्हीं के संग पला हूँ, बढ़ा हूँ,

और सीखा है इन्हें जिंदगी के एक हिस्से की तरह,

वही एहसास आज सवालों के घेरे में थे,

कई सारे यकीन आधे अंधेरे में थे,

खुद को ही नहीं,

अपने एहसासों को चाहे हम जो भी मानते हैं,

हम उन्हें पूरी तरह कभी नहीं जानते हैं ।

.

एक सवाल और भी था,

मेरा उन पर या उनका मुझ पर इख्तियार है,

ये एहसास मुझे राह दिखा रहे हैं,

या इन्होंने मुझ पर कर रखा है काबू,

यह उलझन अब भी बरकरार है ।

ऐसा भी नहीं कि,

काबू में इनके होना मुझे अच्छा नहीं लगा,

पर इसे आखिरी सच मान लूँ,

इतना भी सच्चा नहीं लगा,

बहरहाल उसको भी एक एहसास बना लिया,

आगे बढकर उसको गले लगा लिया ।

.

आड़े-तिरछे रास्तों से गुजरती है,

कभी थमे होने का,

कभी ठगने का,

तो कभी मुड़ कर लौटने का वहम पैदा करती है,

पर हमेशा ऊपर उठाती है,

क्योंकि जिन्दगी हमेशा आगे ही बढ़ती है ।

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