
बहुत दिन हुए महसूस किये अपनी धड़कनें,
बहुत दिन हुए सुबह देर से नहीं जागे,
बहुत दिन हुए कुछ भूला ही नहीं मैं,
बहुत दिन हुए सुलझाये मन के उलझे धागे ।
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बहुत दिन हुए अपने से सवाल नहीं किया,
बहुत दिन हुए मन उदास नहीं हुआ,
बहुत दिन हुए किसी अजनबी से यूँ ही बातें नहीं की,
बहुत दिन हुए अकेलेपन का एहसास नहीं हुआ ।
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बहुत दिन हुए कदम हिचकिचाये नहीं हैं,
बहुत दिन हुए आँखें नम नहीं हुई,
बहुत दिन हुए तेज चले हुए साँसों को,
बहुत दिन हुए जीतने की जिद कम नहीं हुई ।
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बहुत दिन हुए गैरमुमकिन-से सपने नहीं देखे,
बहुत दिन हुए रातों में चौंक कर जागा नहीं,
बहुत दिन हुए किसी ने पुकारा नहीं तारों के पीछे से,
बहुत दिन हुए अनजाने खयालों के पीछे भागा नहीं ।
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बहुत दिन हुए ‘सब अच्छा है‘ कहते,
बहुत दिन हुए खुशी का स्वाद नहीं आया,
बहुत दिन हुए बस एक ही ओर देखते,
बहुत दिन हुए खुद से प्यार जताया नहीं ।
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बहुत दिन हुए यह खुद से कहते-कहते,
कि चलो आज कुछ नयी बात करते हैं,
बहुत दिन हुए खुद से फरेब करते-करते,
चलो आज एक नयी शुरुआत करते हैं ।
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