बाँहें मेरी थाम

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जिंदगी मुझे कई नाम से पुकारती है,

हर वक्त तलाशती नजरों से निहारती है,

कुछ गमजदा हैं कि क्यों मैं इस में उलझ जाता हूँ,

मैं खुश हूँ कि उसका हर इशारा समझ जाता हूँ ।

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हर शाबाशी के बाद का खालीपन,

खुशी रोके न रुकी किये लाख जतन,

हर घाव के गुमान को मिटाता वक्त बेरहम,

जिंदगी तौलती हर जुनून को कदम दर कदम ।

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बदहवासी और होश दोनों संग-संग चले,

अनसुनी और पुकार दोनों लगे भले,

हमराही की तलाश और अकेलेपन की ख्वाहिश,

जिंदगी ने  मेरे नाम की दोनों की ही कशिश ।

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घटता-बढ़ता, जीतता-हारता, और कभी हैरान,

मगर चलने की जिद पर, भीड़ हो या सुनसान,

तुमने मुझे हर रंग में देखा और दिये मुझे नाम,

जिंदगी तेरा शुक्रिया हरदम रखी बाँहें मेरी थाम

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