
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ,
बनी बनायी लीक को छोड़ दूँ,
एक पगडंडी अपनी तैयार कर लूँ ।
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ ।
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मिल गयी है जिंदगी, तो जीये जा रहे हैं,
आखिर क्यों, के सवालों से कतरा रहे हैं,
देख लिये मौजूदा, अपने चलन बना कर,
इस जिंदगी से आँखें दो चार कर लूँ ।
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ ।
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पा लेना, जीने का मतलब बन गया था,
जीत पाऊँ जहाँ, उस शहर को ढूँढ़ता था,
देने की खुशी क्या है, दिया तो पता चला,
अब लेने से अधिक देने का विचार कर लूँ ।
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ ।
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खुशी छुपी कहाँ, तलाश अब भी है जारी,
अपनी है या परायी यह बहस सच पर है भारी,
हर एक की खुशी को अपनी कहूँ तो खुशी है,
चाहता हूँ, अब इस सच को स्वीकार कर लूँ ।
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ ।
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प्यार बांधता, या देता मन को उड़ान है,
हिस्से करता मन के या एक होने का ज्ञान है,
जुड़ूँ अपने मन से और सब को जोड़ पाऊँ,
आज इस भावना का सहज सत्कार कर लूँ ।
सोचता हूँ, अब जिंदगी से प्यार कर लूँ ।
