सानिध्य

02CC41C6-8B21-4AFC-AAD0-8AEED707F790

तल्खियों को बसएक शाम की जरूरत है।

हमें तो शिकायतों से भी मुहब्बत है।

 

ये शोखियाँ, ये कहकहे,

कितने किस्से अधकहे,

ये हल्की-हल्की बेखुदी,

यकीनन,

जिन्दगी बड़ी खूबसूरत है।

Published by

Unknown's avatar

Leave a comment